Kahin To Hogi (कहीं तो होगी)

जला हूँ बहुत मैं तनहा दिए में बाती की तरह,
इस तन्हाई में मेरे साथ जलने वाली कहीं तो होगी,
सुना है राह बड़ी मुश्किल है इश्क की,
पर इस राह में मेरा साथ देने वाली कहीं तो होगी,
बहुत लम्बी ह डगर ज़िन्दगी की ,
पर मेरा हाथ थाम मेरे साथ चलने वाली कहीं तो होगी,
लगे हैं इन होठों में जाम कई ,
पर अपने होठों से पिलाने वाली कहीं तो होगी,
यूँ तो मिलती नहीं मौत भी मांगने से ,
पर हमारे साथ जीने वाली कहीं तो होगी,
यूँ तो मिलती हैं हर मोड़ पे लड़कियां कई
पर घर ले जाने कायक कहीं तो होगी,
काफिला है हमारे साथ फिर भी तन्हा हैं हम ,
इस तन्हाई को मिटने वाली कहीं तो होगी,
भायी हैं इस आँखों को बहुत,
पर इस मन को भाने वाली कहीं तो होगी,
देखी हैं हसीनाएं बहुत इन नज़रों ने ,
पर नज़रें झुक जाये इज्ज़त से वो सादगी कहीं तो होगी,
मर मिटने का मन तो बहुतों पे किया ,
पर जिसके साथ जीने की तमन्ना हो वो खुबसुरतीं कहीं तो होगी!!

BY:- Ashish Kumar Srivastava

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4 comments on “Kahin To Hogi (कहीं तो होगी)

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